शिमला_मिर्च_की_खेती

#शिमला_मिर्च_की_खेती
गहरा हरा रंग, गुद्देदार फल, हल्का तीखा स्वाद और आकर्षित करता हुआ आकार  शिमला मिर्च यानी कैप्सिकम की पहचान हैं। 3000 साल पहले तक दक्षिण अमेरिका के कुछ सीमित भागों में ही इसकी खेती होती थी पर अब स्वाद के खजाने के रूप में विख्यात शिमला मिर्च की खेती दुनिया के हर कोने में हो रही है।

ताजी हरी शिमला मिर्च में विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन के, फाइबर, कैरोटीनॉइड्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद है।  शिमला मिर्च लाल, हरी या पीले रंग की मिलती है। चाहे शिमला मिर्च किसी भी रंग की हो लेकिन उसमें विटामिन सी, विटामिन ए और बीटा कैरोटीन भरा होता है। इसके अंदर बिल्‍कुल भी कैलोरी नहीं होती इसलिये यह खराब कोलेस्‍ट्रॉल को नहीं बढ़ाती। साथ ही यह वजन को स्थिर बनाये रखने के लिये भी योग्‍य है।
शिमला मिर्च की खेती
शिमला मिर्च की खेती अमूमन पॉलीहाउस के अंदर ही की जाती है। दरअसल इसके बेहतर विकास के लिए 21 डिग्री सेल्सियस से लेकर 25 डिग्री सेल्सियस तक की तापमान की आवश्यकता होती है। ज्यादा ठंड और पाला गिरने से फलो का आकार छोटा और टेढ़ा हो जाता है।

उपयुक्त भूमि

इसकी खेती के लिए अच्छे जल निकासी वाली चिकनी दोमट मिट्टी जिसका पी एच मान 6-6.6 होता है. वही बुलई दोमट मृदा भी अधिक खाद को डालकर, सही समय व उचित सिंचाई प्रबंधन द्वारा खेती किया जा सकती है. जमीन की सतह से नीचे क्यारियों की अपेक्षा इसकी खेती के लिए जमीन की सतह से ऊपर उठई एवं समतल क्यारियां ज्यादा उपयुक्त मानी जा सकती है.

उन्नत किस्में

शिमला मिर्च की उन्नत किस्मों में अर्का गौरव, अर्का मोहिनी, अर्का बंसत, ऐश्वर्या, अंलकार, अनुपम, हरी रानी, भारत, पूसा ग्रीन गोल्ड, हीरा, इंदिरा प्रमुख है.

खाद व उर्वरक

खेत की तैयारी के समय 25-30 टन गोबर की सड़ी हुई खाद और कंपोस्ट खाद को डालना चाहिए. आधार खाद के रूप में रोपाई के समय 60 किलोग्राम नत्रजन, 60-80 किग्राम, स्फुर, 60-80 कलोग्राम पोचाश डालान चाहिए. नत्रजन को दो भागों में बांटकर खड़ी फसल में रोपाई के 30 वं 55 दिन बाद टाप ड्रेसिगं के रूप में छिड़कना चाहिए.

रोपण दूरी

सामान्यतः 10-15 सेमी लंबा 4 से 5 पत्तियों वाला पौधा जो कि लगभग 40-45 दिनों में तैयार हो जाता है. रोपण के लिए उसका प्रयोग करें. पौध रोपण के एक दिन पूर्व क्यारियों में सिंचाई कर देना चाहिए. इससे पौधा आसानी से निकाला जा सकता है. पौध को शाम को मुख्य खेत में 60 से 45 सेमी की दूरी पर लगा देना चाहिए. रोपण के बाद खेत की हल्की सिंचाई कर दें.

सिंचाई

सिमला मिर्च की फसल को कम और ज्यादा पानी देने से नुकसान ही होता है.  खेत में ज्यादा पानी का भराव हो गया है तो तुरंत जल निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए. मृदा में नमी होने पर सिंचाई करनी चाहिए. खेत में नमी की पहचान करने के लिए खेत की मिट्टी को हाथ में लेकर लड्डू बनाकर देखना चाहिए. मृदा मे नमी है यदि ना बने तो सिंचाई कर देना चाहिए.

निराई गुरई

रोपम के बाद शुरू के 30-45 दिनों तक खेत को खरपतवार से मुक्त रखना अच्छे फसल उत्पादन की दृष्टि से काफी जरूरी है. पहली निराई -गुढ़ाई रोपण के 25 और दूसरी 45 दिनों के बाद कर देनी चाहिए. पौधे रोपण के 30 दिनों के बाद पौधों में मिट्टी को चढ़ाना चाहिए ताकि पौधे और मजबूत हो जाए और गिरे नहीं. यदि खरपतवार के नियंत्रण हेतु रसायनों का प्रयोग करना है तो खेत में नमी की अवस्था में पेन्डामेथिलीन 4 लीटर 2 किलो प्रति हेक्टेयर की दर का प्रयोग करें.

तुड़ाई

शिमला मिर्च की तुड़ाई पौध रोपण के 65-70 दिनों के बाद ही प्रारंभ हो जाता है. जो कि लगभग 90 से 120 दिनों तक चलता है. नियमित रूप से तुड़ाई का कार्य करना चाहिए. उन्नतशील किस्मों में 100 से 120 क्विंटल एवं संकर किस्मों में 200 से 250 क्विंटल हेक्टेयर उपज मिलती है.
लागत और इनकम।
पॉली हाउस की लागत के अलावा इसकी खेती में प्रति एकड़ 50000 की अतिरिक्त लागत बैठती है वहीं जहां तक मुनाफे की बात है तो हर एकड़ से किसान भाई तकरीबन दो से तीन लाख की कमाई कर सकते हैं।
© Gardener dost

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