ब्लैक_राइस

#ब्लैक_राइस : -खेती, फायदे और मार्के
भारत के हर गली और मोहल्ले में ब्लैक राइस की चर्चा हैं। दरअसल इसके धान और चावल दोनों काले होते हैं यहां तक कि इसके पौधों के भी कई भाग जैसे स्टीम ज्वाइंट और बाली भी काला ही होता है। इसकी  कीमत ज्यादा होने कारण इसका काला रंग नहीं बल्कि इसमें मौजूद पौष्टिक तत्व और औषधीय गुण  का भंडार है जो वाकई में लाजवाब है।

खुशबूदार ब्लैक राइस न सिर्फ औषधीय गुणों से भरपूर है बल्कि किसान भाइयों के लिए आमदनी का एक बहुत अच्छा स्रोत भी है । आज भी इसकी कीमत तकरीबन ₹500 किलोग्राम से ज्यादा हैं।

आइए सबसे पहले जानते हैं ब्लैक राइस के स्वास्थ्यवर्धक गुणों के बारे में।

काला चावल एंटीऑक्सीडेंट के गुणों से भरपूर माना जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी की इसमें कॉफी से भी ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है ।  एंटी ऑक्सीडेंट हमारे बॉडी को डिटॉक्स और क्लीन करने का काम करता है और आज के प्रदूषित वातावरण और मिलावटी फुड से जंग लड़ने के लिए हर इंसान को इसकी आवश्यकता है।  

मधुमेह रोगियों के लिए काला चावल  कमाल की चीज है। इसका नियमित सेवन ना सिर्फ उन्हें दवाइयों से छुटकारा दिला सकता है बल्कि कुछ समय बाद वह सामान्य जीवन जीने लगेंगे। हमारे आसपास के कई लोगों को इससे से काफी लाभ मिला है।

इस धान से निकले चावल में विटामिन बी, ई के अलावा कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन तथा जिंक आदि प्रचुर मात्रा में मिलता है।  इसके सेवन से रक्त शुद्धीकरण भी होता है। साथ ही इस चावल के सेवन से चर्बी कम करने तथा पाचन शक्ति बढ़ने की बात कही जा रही है।

ब्लैक राइस की खेती।

इसकी खेती की सारी प्रक्रियाएं लगभग आम धान की खेती की जैसी ही है ।
हां, किसान भाइयों को इन दो बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए।

आपको ब्लैक राइस वैसे खेतों में लगाना चाहिए जिसमें ज्यादा पानी नही लगता हो । क्योंकि इसे हाइब्रिड धानों के मुकाबले कम पानी की आवश्यकता होती है अतः पानी जमने वाले खेत में इसे ना लगाएं।

इसके पौधों की हाइट तकरीबन साढे 4 फीट से लेकर 5 फीट तक के होते हैं और इसमें फर्टिलाइजर के रूप में सिर्फ पोटाश का उपयोग करना चाहिए।  यूरिया का उपयोग बिल्कुल ना करें क्योंकि इससे पौधे और ज्यादा लंबे होकर गिर सकते हैं।जो किसान भाई जैविक तरीके से खेती करते हैं उनमें उनको कोई भी परिवर्तन करने की जरूरत नही हैं ।

काले धान की फसल को तैयार होने में औसतन 100 से 110 दिन लगते है। विशेषज्ञ बताते है कि पौधे की लंबाई आमतौर के धान के पौधे से बड़ा है। इसके बाली के दाने भी लंबे होते है। 
इसका उत्पादन समान्य धान के मुकाबले कम होता है।

बाजार
कम उत्पादन होने के कारण आज भी इसकी कीमत ₹500 प्रति किलोग्राम से अधिक है। पूर्वोत्तर में राज्य सरकारों के प्रोत्साहन के बदौलत यह चावल जन जन तक पहुंच चुका है वहीं बिहार यूपी एमपी जैसे राज्यों में इसका प्रोडक्शन काफी कम है जिसके कारण किसान भाइयों को अच्छा रेट मिलता है ।बीज के लिए आप इन नंबरों पर संपर्क करें।किसान भाई खुद से भी ब्रांडिंग करके इसे मार्केट तक पहुंचा सकते हैं। पूरे भारत में बहुत सारे ऐसे ही ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म है जोकि इसकी मार्केटिंग करते हैं किसान उनसे भी टैग करके अपनी ब्लैक राइस की फसल को बेज सकते हैं।

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