#धान_की_खेती_के_साथ_मछली_पाल
जहाँ पानी की बहुतायत है वहाँ धान के खेतो में मछली पालन करना बेहद फायदेमंद हो सकता हैं।आपमें से बहुत सारे लोगो ने नहरी ईलाको के धान के खेतो में देखा होगा की उनमें प्राकृतिक रूप मछलियां मौजूद रहती हैं।अगर ईस विधी को व्यापक पैमाने पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाकर किया जाये तो आमदनी दुगना होना निश्चित हैं।
धान के खेत में मछली पालन के फायदे जानकर हैरान रह जायेंगे आप। थाईलैंड के किसानों ने जब धान के खेत में मछलियों के पालने का एक्सपेरीमेंट किया गया तो, किसानों की कमाई लगभग दोगुनी हो गई। खेत में मछलियों के पालन से धान की फसल का उत्पादन तो ऊतना ही रहा लेकिन इसने किसानों की धान की लागत को बहुत कम कर दिया।
रिसर्च के मुताबिक चावल के खेत में मछलियों के पालने से फसल को कम फर्टिलाइजर (fertilizers) और कीटनाशक (pesticides) दवाओं की जरूरत पड़ती है। चावल की खेती में 60-70 प्रतिशत तक खर्च फर्टिलाइजर (fertilizers) और कीटनाशक (pesticides) दवाओं पर ही आता है।
तालाब की बड़ी देसी मछलियों को इस तकनीक में इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि इनको आसानी से नजदीकी बाजार में बेचा भी जा सकता है।
किसानों को फायदा
ऊतने ही खेत में मछली पालन से अतिरिक्त कमाई का रास्ता खुलता है।
धान की फसल की लागत काफी कम हो जाती है। लागत कम होने से लाभ बढ़ जाता है।
पर्यावरण पर काफी अच्छा असर पड़ता है।
धान के खेत में अगर मछलियां रहती हैं तो ये फसल को कई बिमारियों से भी बचाती हैं।
कुछ साल पहले थाईलैंड में धान की फसल पर कीड़ें-मकोड़ो के हमले ने देश की 4 प्रतिशत चावल की फसल को बर्बाद कर दिया था, लेकिन इस हमले की चपेट में आए इलाके में जिन किसानों ने खेत में मछलियों का पालन कर रखा था, उनकी फसल पूरी तरह से बच गई।
वैज्ञानिकों ने रिसर्च में पाया कि धान के पौधों की छाव से पानी ठंडा रहता है जो मछलियां को पानी में सक्रिय बनाए रखता है। और पानी के किनारे वाले पौधों पर लगने वाले छोटे मोटे कीड़े इन्हीं मछलियों का अतिरिक्त खाना बन जाते हैं।