थारपारकर_गाय: भारत की देशी गाय जिस पर ग्लोबल वार्मिंग का भी कोई असर नहीं होगा!

#थारपारकर_गाय: भारत की देशी गाय जिस पर ग्लोबल वार्मिंग का भी कोई असर नहीं होगा!

कुछ एक दो महीने पहले की बात है जब एक न्यूज़ ने पूरे भारत का ध्यान थारपारकर गाय की ओर खींचा था ! इस न्यूज़ में बताया गया था कि ग्लोबल वार्मिंग में भी बेअसर रहेगी थारपारकर गाय।अचानक लोगों के जुबान पर थारपारकर गाय का नाम आ गया। लोग इसे जानने को उत्सुक हो गए और सबको इसमें अपना भविष्य दिखने लगा । हालांकि हालिया रिसर्च में यह बात भी साबित हो गया है कि लगभग लगभग देसी गायों पर ग्लोबल वार्मिंग का कोई असर नहीं होने वाला है। यानी ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी के बढ़ते तापमान में भी देसी गायों के प्रजनन क्षमता और दूध उत्पादन में कोई कमी नहीं आएगा।
थारपारकर गाय की एक और विशेषता रही है जो हमें पहले से ज्ञात हैं यह कम खर्च में ज्यादा दूध उत्पादन के लिए जाना जाता है तो आइए जानते हैं इसके बारे में वह सब कुछ जो आपको जानना चाहिए।

थारपारकर गाय राजस्थान में जोधपुर और जैसलमेर में मुख्य रूप से पाई जाती है। गुजरात राज्य के कच्छ में भी इस गाय की बड़ी संख्या है । थारपारकर गाय का उत्पत्ति स्थल बाड़मेर के 'मालाणी' नामक स्थान है। यह गाय अत्यधिक दूध के लिए प्रसिद्ध है। राजस्थान के स्थानीय भागों में इसे 'मालाणी नस्ल' के नाम से जाना जाता है। इस नस्ल के पशुओं को सफ़ेद सिन्धी और थारी आदि नामो से भी जाना जाता है ।

देशी गौवंश में थारपारकर का कोई मुकाबला नहीं है। मूलतः यह नस्ल कराची (पाकिस्तान) के पास थारपारकर ज़िले की है। सरहदी होने से पश्चिमी राजस्थान में इस गौवंश का प्रभाव अधिक है।
थारपारकर गाय की शारीरिक विशेषता :-
थारपारकर नस्ल की गाय को दूर से ही पहचाना जा सकता है। सफ़ेद व स्लेटी रंग, पूर्ण विकसित माथा, कानों की तरफ़ झुके हुए मध्यम सींग, सामान्य कद-काठी वाली इन गायों की ऊँचाई साढ़े तीन से पौने चार फीट होती है। वयस्क थारपारकर गाय का वजन लगभग 400 किलोग्राम और बैल का 450 किलोग्राम होता है ।
थारपारकर नस्ल की अन्य विशेषता :-
इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहोत अच्छी  होती  है . ये शारीरिक स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम होने के साथ ही सबसे कम खर्च में सर्वाधिक दूध देने वाली गाय मानी जाती है। थारपारकर गाय का विकास कांकरेज, सिन्धी और नागोरी नस्लों से किया गया है ।

इस नस्ल को दोहरे उद्देश्य वाली नस्ल माना जाता है । इस नस्ल के बैल बहोत मेहनती होते हैं
नर थारपारकर को सूखे के उद्देश्य के लिए अच्छा माना जाता है ।

ये जानवर सूखे और चारे की कमी की स्थिति के दौरान छोटे जंगली वनस्पतियों पर भी फल- फूल सकतें हैं
थारपारकर गाय का दूध उत्पादन 
थारपारकर गाय अच्छी दूध उत्पादक मानी जाती हैं । इनके दूध में 5% वसा पायी जाती है । ये गाये प्रतिदन 10 लीटर तक दूध देती हैं ।

देश के पशुपालन व डेयरी संस्थानों में थारपारकर गाय की  काफ़ी मांग बनी रहती है।
© Gardener dost

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