सौंफ_की_खेती

#सौंफ_की_खेती

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लाजवाब सुगंध और अपने बेहतरीन स्वास्थवर्धक गुणों के लिए जाने जाने वाला सौफ वाकई मैं बड़ी कमाल की चीज है।
खाने के बाद अगर हमें सौंफ और मिश्री मिल जाए तो भोजन का आनंद और भी बढ़ जाता है । इसको खाते ही हमारे अंदर एक ताजगी आ जाती है। सौफ गाजर मूल का एक पौधा है जिसके फूल पीले और पत्ते पंखदार होते हैं। ठंडी तासीर वाली इस जड़ी बूटी का भारत सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
  

सौंफ खाने के कुछ बेजोड़ फायदे
सौंफ में कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो स्वस्थ रहने के लिए बहुत जरूरी होते हैं। सौंफ का सबसे बड़ा फायदा तो यह है कि यह याददाश्त बढ़ाता है और शरीर को ठंडा रखता है।सौंफ में कैल्शियम, सोडियम, आयरन और पोटैशियम जैसे कई खनिज तत्व पाए जाते हैं. 
यह पाचन संबंधी समस्याओं से लेकर आंखों की रोशनी बढ़ाने, वजन कम करने और अन्य समस्याओं से छुटकारा दिलाने में मददगार साबित होती है। 

#सौंफ_की_खेती
इसकी खेती मुख्य रूप से मसाले के रूप में की जाती हैI सौंफ के बीजो से तेल भी निकाला जता है, इसकी खेती  गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आँध्रप्रदेश, पंजाब तथा हरियाणा में की जाती हैI
 सौंफ की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु एवं भूमि  

इसकी खेती शरद ऋतु में अच्छी तरह से की जाती है, फसल पकते समय शुष्क जलवायु की आवश्यकता पड़ती हैI बीज बनते समय अधिक ठंडक की आवश्यकता नहीं पड़ती हैI सौंफ की बलुई भूमि को छोड़कर हर प्रकार की भूमि में की जा सकती है, लेकिन जल निकास का उचित प्रबंध होना अति आवश्यक है, फिर भी दोमट भूमि सर्वोत्तम होती हैI उन्नतशील प्रजातियां सौंफ की बहुत सी प्रजातियां पाई जाती है 

खेत की तैयारी

 पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा बाद में 3 से 4 जुताई देशी हल या कल्टीवेटर से करके खेत को समतल बनाकर पाटा लगते हुए एक सा बना लिया जाता हैI आख़िरी जुताई में 150 से 200 कुंतल सड़ी गोबर की खाद को मिलाकर खेत को पाटा लगाकर समतल कर लिया जाता हैI
 
अक्टूबर माह बुवाई के लिए सर्वोत्तम माना जाता हैI लेकिन 15 सितम्बर से 15 अक्टूबर तक बुवाई कर देना चाहिएI बुवाई लाइनो में करना चाहिए तथा छिटककर भी बुवाई की जाती हैI तथा लाइनो में इसकी रोपाई भी की जाती हैI रोपाई में लाइन से लाइन की दूरी 60 सेंटीमीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 45 सेंटीमीटर रखनी चाहिएI जब पौध रोपण दवारा खेती की जाती है तो 7 से 8 सप्ताह पहले रोपाई से पौध डालकर की जाती हैI 
 सिंचाई पौध रोपाई के बाद पहली हल्की सिंचाई करनी चाहिए आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहना चाहिएI बीज बनते तथा पकते समय अवश्य सिंचाई करनी चाहिएI सौंफ की फसल में निराई-गुड़ाई पहली सिंचाई के बाद निराई-गुड़ाई करना आवश्यक रहता है तथा 45 से 50 दिन बाद दूसरी निराई गुड़ाई करना आवश्यक होता हैI बड़ी फसल होने पर निराई-गुड़ाई करते समय पौधे टूटने का भय रहता हैI 

फसल कटाई सौंफ के अम्बेल जब पूरी तरह विकसित होकर और बीज पूरी तरह जब पककर सूख जावे तभी गुच्छो की कटाई करनी चाहिएI कटाई करके एक से दो दिन सूर्य की धुप में सुखाना चाहिए तथा हरा रंग रखने के लिए 8 से 10 दिन छाया में सूखाना चाहिएI हरी सौंफ प्राप्त करने हेतु फसल में जब अम्बेल के फूल आने के 30 से 40 दिन गुच्छो की कटाई करनी चाहिएI कटाई के बाद छाया में ही अच्छी तरह सूखा लेना चाहिएI पैदावार जब पूरे बीजो की कटाई करते है तो 10 से 15 कुंतल प्रति हेक्टेयर पैदावार प्राप्त होती है और जब कुछ हरे बीज प्राप्त करने के बाद पकाकर फसल काटते है तो पैदावार कम होकर 9 से 10 कुंतल प्रति हेक्टेयर रह जाती हैI
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