मुर्रा भैंस: पूरे विश्व में भैंसों की सर्वश्रेष्ठ नस्ल जिसे लोग काला सोना के नाम से जानते हैं!
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लाखों में कीमत! जबरदस्त मिलकिंग कैपेसिटी! विश्व के कई देशों में भारी डिमांड वाले मुर्रा भैंस का कोई सानी नहीं है।विश्व की सर्वश्रेष्ठ भैंस नस्ल मुर्रा हमारे देश की एक अनमोल विरासत है और इसका पशुधन में सर्वोच्च स्थान है, जिसके कारण इसे ‘काला सोना’ कहा जाता है।
भारत के अलावा मिश्र, इटली, इटली श्रीलंका , फिलीपींस जैसे देशों में इसका जबरदस्त क्रेज है। भैंस पलकों की पहली पसंद मुर्रा नस्ल की भैंसों की कमाल की क्वालिटी इसे बाकी सारे भैसो से बिल्कुल अलग बनाती है।यह पालतू भैंस की एक प्रजाति है जो दूध उत्पादन के लिए पाली जाती है। यह मूलतः अविभाजित पंजाब का पशु है किन्तु अब दूसरे प्रान्तों तथा दूसरे देशों मैं भी पाली जाती है। हरियाणा में इसे 'काला सोना' कहा जाता हैै। दूध में वसा उत्पादन के लिए मुर्रा सबसे अच्छी नस्ल है। मुर्रा भैंस के सींग जलेबी आकार के होते हैं। इसके दूध में 7% वसा पाई जाती है। इस भैंस का रंग काला होता है। उत्पत्ति स्थान हिसार से दिल्ली माना जाता है। मुर्रा भैंस की गर्भा अवधि 310 दिन की हौती है अौर अयन विकसित तथा दूध शिराएँ उभरी हौती है।
मुर्रा भैंस और उसकी खासियत
जिन किसानों के पास पर्याप्त हरे चारे, पेयजल एवं संतुलित दाना आदि की व्यवस्था है उनके लिए भैंसपालन अधिक लाभकारी माना गया है।
मुर्रा भैंस की शारीरिक विशेषता और खासियत
मुर्रा पशु भारी-भरकम डील-डोल वाले होते हैं तथा इनकी गर्दन और सिर अपेक्षाकृत हल्के होते हैं। सींग छोटे और कसकर मुड़े होते हैं। इनका रंग काला व पूंछ लंबी होती है। इनका पिछला हिस्सा चौड़ा तथा अगला हिस्सा संकरा होता है । इनकी आंख की पुतली नीली होती है इसलिए इसे नीली या पंच कल्याणी भी कहते हैं। मादा पशु का वजन लगभग 550 किलोग्राम के आसपास होता है तथा मादा पशु की ऊंचाई 133 सेंटीमीटर के आसपास होती है। वहीं नौजवान नर पशु का वजन 650 किलोग्राम के आसपास होता है तथा उसकी ऊंचाई 138 सेंटीमीटर के आसपास होती है।
मुर्रा भैंस का दूध उत्पादन
मुर्रा भैंस सबसे अधिक उत्पादन वाली भैंस की नस्ल है। मुर्रा प्रजाति की भैंसे देशी एवं अन्य प्रजाति की भैंसों से दो से तीन गुणा अधिक दूध देती है. यह प्रतिदिन 15 से 20 लीटर दूध आसानी से दे देती हैं । इस भैस की Lactation अथवा दूध देने की अवधि आमतौर पर 280-310 दिन है जो अन्य भैंसों से अपेक्षाकृत लंबे समय तक है । मुर्रा भैंसे अपने एक दूधकाल में लगभग 1800 से 4000 लीटर तक दूध देती हैं। इसके दूध में fat की मात्रा 7 से 8 प्रतिशत होती है। इस वजह से अन्य दुधारू पशुओं के दूध के मुकाबले मुर्रा नस्ल की भैंसों का दूध अधिक दर पर बिकता है।
मुर्रा भैंस की अन्य विशेषता
ये भैसें गर्म अथवा ठन्डे किसी प्रकार की जलवायु में भी जीवित रहने में सक्षम होते है । मुर्रा नस्ल की भैंस देख-रेख के लिए आसान होती हैं । अन्य नस्लों की तुलना में इन का स्वास्थ्य बेहतर रहता है क्योंकि इन भैसों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है। मुर्रा नस्ल के भैंस पालने में सबसे बड़ा लाभ यह भी है कि इसकी एक से डेढ़ वर्ष का बच्चा 25 से 30 हजार रुपये में आसानी से बिक जाती है।
मुर्रा नस्ल का नर बच्चा(पाड़ा) भी दो-तीन वर्ष में भैंसा बन जाता है जो 50-60 हजार रुपये में आसानी से बिक जाता है.